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Sochne ki baat hai......

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गैर ज़िम्मेदार लोग जहाँ कही भी होते है, वो खुद से ज्यादा दूसरों का नुक्सान करते है.....और पूरी बेशर्मी के साथ अपनी गैर ज़िम्मेदारी को आप पर थोपे हुए, आपके आस पास बने रहते है....ऐसे लोग सिर्फ और सिर्फ आपका इस्तेमाल करके तब तक आपका फायदा उठाना चाहते है जब तक आप उन्हें बर्दाश्त कर सकते है....जब तक आप में उनसे झूझते रहने का माद्दा है....सख्त ज़रूरत है की समय रहते ऐसी नस्ल की पहचान की जाये और इन्हें अपने आस पास भी फटकने का मौका ना दिया जाये....वरना ये दीमक की तरह आपका सब कुछ खा जायेंगे और अंततः आप से पल्ला झाड के अपनी नयी राह चलते बनेगे, फिर दुबारा किसी और का, किन्ही और मायनो में नुकसान करने और उनसे अपना फायदा उठाने !!!!!!

Mehfil

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बड़ी शिद्दत से एक अनुभव सबसे साँझा करने का मन कर रहा है....अनुभव कहू या सवाल....ठीक ठीक कुछ तेय नहीं कर पाती....हैरान इस बात से भी हू की जिन्दगी बार बार मुझे ही इतने मौके क्यों देती है अपनी असल झलक दिखाने की या शायद में ही बातो को गौर से सुनने की आदत बना चुकी हू......तो हुआ ये की एक महफ़िल में बैठने का मौका मिला.....गुफ्तुगू कुछ यू चली की एक ऊची जाति की लड़की ने अपनी पसंद से एक नीच जाति के लड़के से शादी कर ली......जिनकी लड़की थी, उस रिश्तेदार ने बहुत गर्व से बताया की उनके घर के छोटे बच्चे के पूछने पर की, “वो दीदी अब घर क्यों नहीं आती”, पहले तो उन्होंने उससे गुमराह किया की ऐसी कोई लड़की कभी खानदान में थी ही नहीं...ज़रूर वो किसी और की शकल से धोखा खा रहा है....छोटे बच्चे ने जब पुरानी एल्बम निकाल के अपनी बात को दुबारा कहना चाहा तो उसे बताया गया की वो लड़की तो मर गयी......और इस तरह एक जिंदा इंसान का वजूद अगली पीढ़ी के लिए खतम कर दिया गया......गलती क्या.....गलती सिर्फ इतनी की एक लड़की ने कैसे हिमाकत की, अपना फैसला लेने की और लेके उससे लागू करने की......और अंततः उस महफ़िल में बैठी लगभग

JAAGO !!!!!!

दामिनी की मौत ! देश के लिए एक शर्मनाक घटना ! सोच के भी रूह काँप उठती है की किस तरह के सामाजिक , नैतिक पतन की और जा रहे  है हम.....हमारे संस्कार क्यों इतने कमज़ोर हो चलें है की हम अपनी ही औरुतो की सुरक्षा कर पाने में असमर्थ है......उपभोगतावाद की इस संस्कृति में सब कुछ उपभोग की श्रेणी में आ गया है...हम ने अपने दायरे सिर्फ अपने आप तक सिमित कर लिए है.....हम ने मान लिया है की यदि हम सुरक्षित है तो सब सुरक्षित ही होंगे.....सुबह की ताज़ा खबर चाय की चुस्कियो के साथ पड़ना सिर्फ एक शौक और ये दिखाने का नजरिया भर बनके कह गया है की हम भी पढ़े लिखे है.....पर सवाल ये है की क्या सचमुच हम ज्ञानी है ?.....जब हमारी बुद्धि सही और गलत के फर्क को पहचान ही नहीं पाती तो ये किस तरह का ज्ञान हम सहेज के चल रहे है....?....और इस ज्ञान के बलबूते हम किस तरह का मार्गदर्शन दे पाने में सक्षम है अपनी नयी पौध को ?....दामिनी की मौत कई तरह के सवाल खड़े करती है.....ये पूछती है हमसे की आखिर ये किसकी हार है..... हमारे समाज की , हमारी व्यवस्था की या हमारे पारंपरिक मूल्यों की ....एक बच्चा जब जनम लेता है तो उसका सबसे पहला व

kal tak

कल पत्थर की तरह था में परसों था लोहे की तरह कल धुल की तरह हो जाऊ परसों धागे की तरह हो जाऊ रुई के गुण गाऊ ! अगले महीने आटे की तरह साल भर बाद पानी की तरह आगे हवा की तरह हो जाऊ फिर आग की तरह हो जाऊ धधक कर ज़लू- जलाऊ  बहुत पहले खेत की तरह हो गया में   कभी आकाश की तरह फैल जाऊ बदल बन जाऊ उमड़ घुमड़ कर गरज बरस जाऊ रोज़ रोज़ हर पल उगता ढलता जा रहा हु जितना चलता जा रहा हु उतना बदलता जा रहा हु !

Anubhav

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जीवन में मेरे अनुभवों का संसार बहुत विचित्र  है ! लोगो का करीब आना और छटक कर दूर किसी अँधेरे में गुम हो जाना मानो जीवन की नियति रही है ! जीवन की विडम्बना यही रही की ये काफिला कभी रुका नहीं, कभी अकेली नहीं रही पर कोई दूर तक साथ निभा नहीं पाया ! जगह खाली हुई, फिर भरी, फिर खाली हुई , फिर भरी और इस खाली होने और भरने की प्रक्रिया में हर बार सिर्फ में और में ज़ख़्मी हुई,  में टूटी, में कमज़ोर हुई __________ एक कोमल लता समान ! पर अंतत इस पूरी यात्रा में मेरे अनुभवों का वटवृक्ष बढता गया और मैंने पाया की अब मैंने जीवन यात्रा में चोटिल न होने की कला सीख ली है.........पर क्या सचमुच ?.....कहना कठिन है.....! क्यूकि यात्रा अभी चलायेमान है और में अभी भी सीख रही हु.....:)

Happy Women's Day

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आज की रात बहुत गर्म हवा चलती है , आज की रात न फूटपाथ पे नींद आएगी , सब उठो,में भी उठू , तुम भी उठो, तुम भी उठो, कोई खिड़की इसी दीवार में खुल जाएँगी.... ये ज़मी तब भी निगल लेने को आमादा थी, पाँव जब टूटती शाखाओं से उतारे हमने, इन मकानों को खबर है, न मकीनो  को खबर , उन दिनों की जो गुफाओ में गुज़ारे हमने, अपनी आँखों में लिए मेहनत-ऐ-पैहम की थकन, बंद आँखों में इसी कस की तस्वीर लिए, दिन पिघलता है इसी तरह सरो पर  अब तक, रात आँखों में कटती है सियाह तीर लिए..... आज की रात बहुत गर्म हवा चलती है , आज की रात न फूटपाथ पे नींद आएगी , सब उठो,में भी उठू , तुम भी उठो, तुम भी उठो, कोई खिड़की इसी दीवार में खुल जाएँगी.... " कैफ़ी आज़मी "

HUNGRY KYA....

Stuffed Potato in Spinach Gravy Ingredients:   Spinach leaves, Corriander leaves, Mint leaves, Green Chillies, Cumin seeds, Mango powder, Kishmish, Tomatoes, Corriander  powder, Kasoori Methi/Methi leaves, Curd , Garam Masala, Potato ( cylindrical in shape and big in size),Turmeric powder, Salt,  Desi ghee, oil for frying. Recipie : ü   Add corriander leaves, mint leaves, finely chopped green chillies, cumin seeds, mango powder, kishmish and make a smooth green  paste. ü   Heat oil in a pan and add turmeric powder, chopped tomatoes, corriander powder, methi leaves ( 2 tsp), garam masala, spinach leaves ( 1 big bowl), salt, and cook for 1 min. Now add  churned curd ( 1 katori) and cook well. Finally grind it into a smooth paste. ü   Cut potaoes from one end and scoop it out. Fry this potato katori slightly in oil and then fill the green paste into it and rub the remaining over it. ü   In a pan keep these stuffed potatoes and pour the spinach gravy over it. Add 2 tbsp desi