Ye Duriyaan....

Ye Duriyaan....

Friday, May 31, 2013

Sochne ki baat hai......



गैर ज़िम्मेदार लोग जहाँ कही भी होते है, वो खुद से ज्यादा दूसरों का नुक्सान करते है.....और पूरी बेशर्मी के साथ अपनी गैर ज़िम्मेदारी को आप पर थोपे हुए, आपके आस पास बने रहते है....ऐसे लोग सिर्फ और सिर्फ आपका इस्तेमाल करके तब तक आपका फायदा उठाना चाहते है जब तक आप उन्हें बर्दाश्त कर सकते है....जब तक आप में उनसे झूझते रहने का माद्दा है....सख्त ज़रूरत है की समय रहते ऐसी नस्ल की पहचान की जाये और इन्हें अपने आस पास भी फटकने का मौका ना दिया जाये....वरना ये दीमक की तरह आपका सब कुछ खा जायेंगे और अंततः आप से पल्ला झाड के अपनी नयी राह चलते बनेगे, फिर दुबारा किसी और का, किन्ही और मायनो में नुकसान करने और उनसे अपना फायदा उठाने !!!!!!

Thursday, May 30, 2013

Mehfil


बड़ी शिद्दत से एक अनुभव सबसे साँझा करने का मन कर रहा है....अनुभव कहू या सवाल....ठीक ठीक कुछ तेय नहीं कर पाती....हैरान इस बात से भी हू की जिन्दगी बार बार मुझे ही इतने मौके क्यों देती है अपनी असल झलक दिखाने की या शायद में ही बातो को गौर से सुनने की आदत बना चुकी हू......तो हुआ ये की एक महफ़िल में बैठने का मौका मिला.....गुफ्तुगू कुछ यू चली की एक ऊची जाति की लड़की ने अपनी पसंद से एक नीच जाति के लड़के से शादी कर ली......जिनकी लड़की थी, उस रिश्तेदार ने बहुत गर्व से बताया की उनके घर के छोटे बच्चे के पूछने पर की, “वो दीदी अब घर क्यों नहीं आती”, पहले तो उन्होंने उससे गुमराह किया की ऐसी कोई लड़की कभी खानदान में थी ही नहीं...ज़रूर वो किसी और की शकल से धोखा खा रहा है....छोटे बच्चे ने जब पुरानी एल्बम निकाल के अपनी बात को दुबारा कहना चाहा तो उसे बताया गया की वो लड़की तो मर गयी......और इस तरह एक जिंदा इंसान का वजूद अगली पीढ़ी के लिए खतम कर दिया गया......गलती क्या.....गलती सिर्फ इतनी की एक लड़की ने कैसे हिमाकत की, अपना फैसला लेने की और लेके उससे लागू करने की......और अंततः उस महफ़िल में बैठी लगभग सभी लोगो ने एक आह भरके कहा की, “ऐसा कहने के अलावा और चारा भी क्या रह जाता है अगर एक लड़की इस हद तक आगे निकल जाये”.......मेरे आँखों के सामने वो तस्वीरे कौंध गयी जब वो ही लड़की सबकी आँखों का तारा हुआ करती थी......में सच में इस इन्सेन्सितिविटी को समझ नहीं पायी.........सवाल मन में ये जागा की इसी महफ़िल में अगर हालात बदल जाये और एक ऊची जाति का लड़का अगर नीची जाति की लड़की से शादी कर ले तो यही उसके अपने लोग क्या फिर अपनी अगली पीढ़ी के लिए कह पाएंगे की ऐसा कोई लड़का खानदान में था ही नहीं और अगर था तो अब मर गया......क्या इतनी ही साफगोई से  ऐसा ही कोई झूठ गडा जायेगा......शायद नहीं.........!!!!!!!!

Saturday, December 29, 2012

JAAGO !!!!!!



दामिनी की मौत ! देश के लिए एक शर्मनाक घटना ! सोच के भी रूह काँप उठती है की किस तरह के सामाजिक , नैतिक पतन की और जा रहे  है हम.....हमारे संस्कार क्यों इतने कमज़ोर हो चलें है की हम अपनी ही औरुतो की सुरक्षा कर पाने में असमर्थ है......उपभोगतावाद की इस संस्कृति में सब कुछ उपभोग की श्रेणी में आ गया है...हम ने अपने दायरे सिर्फ अपने आप तक सिमित कर लिए है.....हम ने मान लिया है की यदि हम सुरक्षित है तो सब सुरक्षित ही होंगे.....सुबह की ताज़ा खबर चाय की चुस्कियो के साथ पड़ना सिर्फ एक शौक और ये दिखाने का नजरिया भर बनके कह गया है की हम भी पढ़े लिखे है.....पर सवाल ये है की क्या सचमुच हम ज्ञानी है ?.....जब हमारी बुद्धि सही और गलत के फर्क को पहचान ही नहीं पाती तो ये किस तरह का ज्ञान हम सहेज के चल रहे है....?....और इस ज्ञान के बलबूते हम किस तरह का मार्गदर्शन दे पाने में सक्षम है अपनी नयी पौध को ?....दामिनी की मौत कई तरह के सवाल खड़े करती है.....ये पूछती है हमसे की आखिर ये किसकी हार है..... हमारे समाज की , हमारी व्यवस्था की या हमारे पारंपरिक मूल्यों की ....एक बच्चा जब जनम लेता है तो उसका सबसे पहला विद्यालय उसका अपना घर होता है....अपने घर में वो सबसे पहले सीखता है सम्मान देने का तात्पर्य क्या है , ये किसे देना है और क्यों देना है.....रिश्तों का सही मूल्य का ज्ञान वो अपने परिवार से जान पता है....मनुष्यता से उसका परिचय परिवार ही करता है .....लेकिन आज हम खुद को कुछ खास और अलग दिखाने की प्रवत्ति में हम उसी बच्चे को सिखाते है दूसरों के साथ भेदभाव कैसे करना है....हम हर कदम पर उसे सिखाते है , आगे बढ़के की फर्क कैसे किया जाता है....हम सिखाते है उसे की उसके घर का व्यक्ति तो सम्मान का अधिकारी है लेकिन समाज से किसी भी और दायरे से आया व्यक्ति ,जैसे हमसे अलग अलग हैसियत रखने वाला , हमसे अलग पहचान रखने वाला उस सम्मान का अधिकारी नहीं......मुझे याद है खास दो परिवारों के अपने अनुभव जिन्हें देखके मेरे मन में ये प्रश्न आया की ये कौन से सामाजिक मूल्य है जिसकी ये परिवार संरचना कर रहे है.....पहला वो स्वर्ण परिवार जो खुद के जनम से स्वर्ण होने पे कुछ इस हद तक इतराते हुए अपने घर के ये नियम निर्धारित करता है की घर की चौखट पे खड़े किसी भी अनजान, निर्धन प्यासे व्यक्ति को पानी बाहर रखे उन बर्तनों में दिया जाना चाहिए जिन्हें बाद में मंझना ना पड़े क्योंकी कौन जाने पानी मांगने वाला कौन सी जाति से था, ना सिर्फ जात , उसकी आर्थिक संपन्नता भी चूँकि हमसे मेल नहीं खाती इसलिए वो मनुष्यता के नाते भी सम्मान का पात्र नहीं....जो माँ इन मूल्यों को लगभग गौरान्वित होते हुए, अपनाये हुई थी , वो नहीं जानती थी की वो किन संस्कारों का निर्माण कर रही है और अपने बच्चो तक उनका संचार कर रही है.....मुझे हैरानी नहीं होंगी अगर आज में फिर ये देखू की उसकी पुत्री उसी की परंपरा को आगे बढ़ा रही हो या उसका पुत्र अपनी स्त्री को यही परंपरा निभाने को कहे बावज़ूद इसके की दोनों ही पुत्र और पुत्री और पुत्रवधू अपनी माँ से कई ज्यादा शिक्षित होंगे.......दूसरा अनुभव उस परिवार का जंहा खुदकी पहचान , अच्छी आर्थिक सम्पन्ता हासिल करते ही, समाज से अधिक सम्मान पाने की लालसा में कुछ यु छुपा ली जाती है की फिर आचरण भी सवयं ही बदल जाता है.....यहाँ भी समाज के एक वर्ग से आया बुढा भिक्षुक साधु बाहर रख्खें हुए बर्तनों में खाना खाने का अधिकारी है क्यों की उसकी जात का पता नहीं और ना ही उसकी आर्थिक सम्पन्ता हमसे मेल खाती है....बस फर्क इतना है की यहाँ साधु को भोजन कराना हमारी खुदकी ज़रूरत है इसलिए हमने फर्क और ज़रूरत दोनों को एक साथ समझते हुए बीच का रास्ता निकाल के एक नए संस्कार का निर्माण कर लिया....हमने सीख लिया की घर के वृद्ध और बाहर के वृद्ध में सम्मान का फर्क कैसे करना है और उसका आधार क्या हो.....इन दोनों ही अनुभवों को अगर उपरी सतह पे हम देखेंगे तो ज़रूर ये जातिगत और आर्थिक भेदभाव का आधार लगेगे पर मेरा मानना है की ये कही गहरे निर्माण करते है , भेदभाव करने के उस कौशल का जहा दूसरों को सम्मान ना दिया जाये जो हमारे अपने नहीं है....उस कौशल का जो हमे ये सिखाए की दूसरों के प्रति अस्वन्देनशील किस प्रकार हुआ जाये.....और यही प्रवति आज के समय में इन छोटे छोटे मूल्यों से सीखके जिनके रचयिता अनजाने ही हम खुद है , बनाती है उस समाज को जहा सुबह चाय की चुस्कियां पीते खबरों का असर पढके भी, हम पर इसलिए नहीं होता क्यों की जिस पर ये बीता वो हमारा अपना नहीं है.....हम फर्क करना बचपन से जानते है की कौन हमारा अपना है और कौन पराया , घर के दायरे में , धर्म के दायरे में, जात के दायरे में, आर्थिक संपन्नता के दायरे में, पहचान के दायरे में........परायो के प्रति असंवेदनशील कैसे रहा जाता है ये हमने सब से पहले हमने अपने घर में सिखा है.....पर बात सिर्फ इन दो अनुभवों पे आके नहीं रूकती ....ना मालूम ऐसे कितने ही और संस्कार है जिनका नर्माण हम अनजाने ही करते जाते है अपने हर दिन के आचरण में और फिर समाज को ले आते है विस्फोट की उस दिशा में जैसा हमने अब जाके देखा..........समाज में व्यवस्था का निर्माण भी हम ही करते है ...इस में कोई दो राय नहीं समय आ गया है की इस व्यवस्था को अब बदलना होगा जो हमे एक सुरक्षित समाज देने में असक्षम है ....लेकिन उस से भी बड़ी ज़रूरत है , कई गहरे उस मानसिकता में झाँकने की जो हमे आज इस मोड पर ले आई है ......आज भी सच ये है की की छोटे बच्चो की सोच के साथ खेलने के बाद हम अपने नौजवानों के सामने उसी घर में ये मिसाल लेके आते है की अगर गलती लड़के की है तो उसको सुधरने के सौ मौके दिए जायेंगे और फिर भी वो नहीं बदला तो उसके साथ ताल मेल बना के उससे वैसे ही अपना लिया जायेगा लेकिन एक लड़की की अगर कोई गलती ऐसी है जो समाज की सोच से मेल नहीं खाती तो सबसे पहले उसका बहिष्कार कर दिया जायेगा ताकि वो किसी और के सामने अपने हक की मिसाल कायम ना कर सके ........समय आ गया है की हम अपनी खुदकी दोहरी मानसिकता से बाहर आये और निर्माण करे उस समाज का ,जहा किसी का भी सम्मान और अधिकार बराबर का हो बिना किसी भेद्बाव के.....और तब भी अगर कोई इस से इतर कुछ करे तो हो हमारे पास वो व्यवस्था हो जिसके बलबूते हम ये कह सके की हाँ इन्साफ होता है इस देश में और सही समय पे होता है......................!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

Sunday, July 3, 2011

kal tak

कल पत्थर की तरह था में
परसों था लोहे की तरह
कल धुल की तरह हो जाऊ
परसों धागे की तरह हो जाऊ
रुई के गुण गाऊ !

अगले महीने आटे की तरह
साल भर बाद पानी की तरह
आगे हवा की तरह हो जाऊ
फिर आग की तरह हो जाऊ
धधक कर ज़लू- जलाऊ 

बहुत पहले खेत की तरह हो गया में  
कभी आकाश की तरह फैल जाऊ
बदल बन जाऊ
उमड़ घुमड़ कर गरज बरस जाऊ

रोज़ रोज़ हर पल
उगता ढलता जा रहा हु
जितना चलता जा रहा हु
उतना बदलता जा रहा हु !

Thursday, April 28, 2011

Anubhav

जीवन में मेरे अनुभवों का संसार बहुत विचित्र  है ! लोगो का करीब आना और छटक कर दूर किसी अँधेरे में गुम हो जाना मानो जीवन की नियति रही है ! जीवन की विडम्बना यही रही की ये काफिला कभी रुका नहीं, कभी अकेली नहीं रही पर कोई दूर तक साथ निभा नहीं पाया ! जगह खाली हुई, फिर भरी, फिर खाली हुई , फिर भरी और इस खाली होने और भरने की प्रक्रिया में हर बार सिर्फ में और में ज़ख़्मी हुई,  में टूटी, में कमज़ोर हुई __________ एक कोमल लता समान ! पर अंतत इस पूरी यात्रा में मेरे अनुभवों का वटवृक्ष बढता गया और मैंने पाया की अब मैंने जीवन यात्रा में चोटिल न होने की कला सीख ली है.........पर क्या सचमुच ?.....कहना कठिन है.....! क्यूकि यात्रा अभी चलायेमान है और में अभी भी सीख रही हु.....:)

Tuesday, March 8, 2011

Happy Women's Day

आज की रात बहुत गर्म हवा चलती है ,
आज की रात न फूटपाथ पे नींद आएगी ,
सब उठो,में भी उठू , तुम भी उठो, तुम भी उठो,
कोई खिड़की इसी दीवार में खुल जाएँगी....

ये ज़मी तब भी निगल लेने को आमादा थी,
पाँव जब टूटती शाखाओं से उतारे हमने,
इन मकानों को खबर है, न मकीनो  को खबर ,
उन दिनों की जो गुफाओ में गुज़ारे हमने,

अपनी आँखों में लिए मेहनत-ऐ-पैहम की थकन,
बंद आँखों में इसी कस की तस्वीर लिए,
दिन पिघलता है इसी तरह सरो पर  अब तक,
रात आँखों में कटती है सियाह तीर लिए.....

आज की रात बहुत गर्म हवा चलती है ,
आज की रात न फूटपाथ पे नींद आएगी ,
सब उठो,में भी उठू , तुम भी उठो, तुम भी उठो,
कोई खिड़की इसी दीवार में खुल जाएँगी....

" कैफ़ी आज़मी "



Tuesday, November 9, 2010

HUNGRY KYA....

Stuffed Potato in Spinach Gravy

Ingredients:  Spinach leaves, Corriander leaves, Mint leaves, Green Chillies, Cumin seeds, Mango powder, Kishmish, Tomatoes, Corriander  powder, Kasoori Methi/Methi leaves, Curd , Garam Masala, Potato ( cylindrical in shape and big in size),Turmeric powder, Salt,  Desi ghee, oil for frying.
Recipie :
ü  Add corriander leaves, mint leaves, finely chopped green chillies, cumin seeds, mango powder, kishmish and make a smooth green  paste.
ü  Heat oil in a pan and add turmeric powder, chopped tomatoes, corriander powder, methi leaves ( 2 tsp), garam masala, spinach leaves ( 1 big bowl), salt, and cook for 1 min. Now add  churned curd ( 1 katori) and cook well. Finally grind it into a smooth paste.
ü  Cut potaoes from one end and scoop it out. Fry this potato katori slightly in oil and then fill the green paste into it and rub the remaining over it.
ü  In a pan keep these stuffed potatoes and pour the spinach gravy over it. Add 2 tbsp desi ghee and put lid over pan and cook it over dum (dim flame) for around 7-8 min.
ü  Serve it hot with naan or poori.( first keep potatoes and then pour the gravy over it.)

Wednesday, November 3, 2010

kya kahu....

कई बार मुझे लगता है मेरी बदकिस्मती मेरी किस्मत से दो कदम आगे चलती है....हर बार  जब ये लगता है अब कुछ अच्छा होगा तभी ख़ुशी कुछ और कदम  , और आगे खिसक जाती है...ऐसा क्यों होता है मेरे साथ..कभी कभी मन बहुत उदास हो जाता है...पर फिर में खुद से कहती हु की कोई तो दिन मेरा होगा न जब सब कुछ वो होगा जैसा मैंने चाहा था....उम्मीद और नाउम्मीद के बीच झूलती में  कभी कभी भीड़ के बीच भी खुदको बहुत अकेला पाती हु...

Sunday, October 24, 2010

Happy Now.....

अंततः मुझे हिंदी टाइपिंग का तरीका मिल ही गया . आज कुछ नया सिखा इसकी ख़ुशी है और भी अपनी भाषा में लिखना इससे अच्छा और क्या हो सकता है.....मज़ा आ गया....... दिन का अंत इस तरह होगा मुझे उम्मीद नहीं थी क्युकी आज का दिन बहुत ही बेचैनी भरा था ....कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या करना चाहती हु....बस ऐसे लग रहा था की कुछ बदलाव आ जाये....कुछ intersting करने को मिल जाये....और यक़ीनन जो मिला है उसने अचानक ही मेरे chemical हारमोंस का लेवल change कर दिया है...कुछ देर पहले  तक  mein  बहुत dull महसूस हो रहा था और अब में excited  हु .......ये अच्छा लग रहा है.......

Sunday, September 19, 2010

scrap of the life....

why few relations become like scrap of ur life....they occupy space but they possess no utility or most of the time.....niether u can throw them nor u wanna keep them.....its a tough situation....with the passing time u get emotionally bound with this scrap knowing the fact that its just occupying the space.....useless......

Friday, September 17, 2010

gaflat ka kissa.....

hamare do jaanne walo ko kisi ne ye galti ke yakeen dila diya hai ki wo kuch famous logo ke jaise hi dekhte hai....aur unka ye celebrity prem dekh kar hum bade trast hai....log aise nasamjh kyu hote hai...kisi ke itne bade fan hone ka kya matlab bhai ki aap khud ko unse kuch kam hi na samjhe...halaki dono hamare jeevankaal ke alag alag adhyaye se hai par unki atishyokti wahi ek jaisi hai....koi to unhe samjhaye ki bhaiya wo celebrity apni jagah hai par aap apni identity ke sath jeena sikhiye.....aisi gaflat ka shikar uperwala kisi ko na banaye.....:)

Saturday, July 31, 2010

Watermelon Cooler


Ingredients: Watermelon , fresh mint leaves, lemon juice , pinch of rock salt, crushed ice, mint syrup( optional).
 Method: Blend all the ingredients in blender and serve chilled.
 Note: Amount of ingredients can be added as per need.

Monday, June 14, 2010

My Birthday…...


Today is my b'day…this bday is special becoz I,m celebrating this with two little princessess of mine…i have planed to throw a party for them…and we are gonna have a blast….our party menu is very temptating…n the menu goes like this…..thick tomato soup with yummy maggi noodles in it followed by yummy tangy pasta and chatpati kurkuri bhelpuri and delicious Malpua ( a granny's speciality of course ) ….orange juice….followed by a doloup of vanilla ice cream and last but not the least a taste of yummy 5 star choclate. I,ve got beautiful drawing as a gift from my little n naughty dolls……this b'day has became actually special b'coz of them.

Saturday, May 2, 2009

what to say and what to not.....

well....blog ye soch kar shuru kiya tha ki jo bhi kuch hai man mein sab kuch likh kar bahar le aaugi....par ab ehsaas hota hai man bhi kitna zatil hai...sochta to bahut kuch hai par batana kuch nahi chahta....sab kuch jaise kisi kaal kothri mein band ho...mein iske darwaze kholna chahti hu par jaise isko bhi zang lag gaya hai....dusaro ke blog dekhti hu to sochti log itna kuch kaise likh jate hai.......kher koshish zari hai kabhi na kabhi to manzil hasil hogi hi......

Thursday, April 23, 2009

kanyadaan

sumtimes i feel this word shuld not be there in anyone,s dictionary...kanyadaan ..what does it mean.... kya kisi jeeti jagti zindagi ke malik bankar aap uska daan karne ke liye uske bhagwaan ban sakte hai....kya kanya i mean girl uska uski life par koi haq nahi...wo mehaz ek daan ki cheeze hai..aur kyu log isi ko sach maan kar waisa hi bartaw shuru bhi kar dete hai...kyu ladki se ye nahi poocha jata ki akhir wo kis mein khush hai...kyu ye maan liya jata hai ki hum jisse pasand karenge wo ladki ko bhi pasand aa hi jayega..aur kyu agar ladki ki pasand wo nahi ban pati jo uske apno ki pasand hai to kyu usko hi apni pasand badalne ka mashwara diya jata hai....pata nahi kitni aur mujhe abhi dekhne ko milingi jo kanyadaan ka hissa nahi banna chahti....jo chahti hai ki unhe unki zindagi ka haq diya jaye......jo chahti hai ki unki pasand unki apni ho phehi ya akhiri par unki apni na ki kisi pasand ko wo apni pasand bataye......i dont know when thngs will be better......

Wednesday, April 22, 2009

LIFE IS TOUGH.....

bahut mushkil hai bhaiiiiiiiiiiii.....kabhi up kabhi down....kuch samajh nahi aata kaha jaye,kya kare....phir acanak kisi ek din aisa lagta hai ki zindagi ko jee le.....dont knw mind mein kitne chemical loche hote hai.....but well today i,m in gud spirit so feels like i,m still alive n having lots of work to do......

Thursday, April 16, 2009

just started

hi....so finally i started today with blogging n all ...u c d trend following...but nt exactly i,m just doing it bcoz of trend ..it s gud platform to express urself...i,m here to expess whtever i feel n it could be anythng...anythng means anythng...from sharing a recipe to discussing a diet tip or anythng happy to anythng extremly painful....but yes one thng is sure i want to share whatever i,m going thru..whatever i have seen n heard...whatever i,m destined to suffer or gain.... so i thnk for starting its fine enough...