कई बार मुझे लगता है मेरी बदकिस्मती मेरी किस्मत से दो कदम आगे चलती है....हर बार जब ये लगता है अब कुछ अच्छा होगा तभी ख़ुशी कुछ और कदम , और आगे खिसक जाती है...ऐसा क्यों होता है मेरे साथ..कभी कभी मन बहुत उदास हो जाता है...पर फिर में खुद से कहती हु की कोई तो दिन मेरा होगा न जब सब कुछ वो होगा जैसा मैंने चाहा था....उम्मीद और नाउम्मीद के बीच झूलती में कभी कभी भीड़ के बीच भी खुदको बहुत अकेला पाती हु...
1 comment:
Main janti hun
ki mere sath hazaron honge
jab main jeet jaungi
par
tab mujhe unki zarurat nhi hogi
Post a Comment